गिल्लू — लेखिका परिचय, संस्मरण का सार एवं शब्दार्थ
लेखिका परिचय : महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में सन् 1907 में हुआ। माता हेमरानी और पिता गोविन्दप्रसाद वर्मा — दोनों कुलीन व धनी परिवार के थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया और प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रिंसिपल बनीं; नारी-शिक्षा में उनका अमूल्य योगदान रहा। वे विदुषी, जागरूक एवं सहानुभूतिशील थीं — तेज बुद्धि और कोमल हृदय की धनी। उन्होंने नारी के स्नेह-प्रेम, त्याग-ममता और क्षमता की बेजोड़ छवियाँ आँकीं; नारी को ‘दीपशिखा’ कहा। वे छायावाद युग की प्रख्यात कवयित्री हैं और ‘प्यार और पीड़ा की लेखिका’ कही जाती हैं।
प्रमुख रचनाएँ — काव्य : नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा। रेखाचित्र : अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ। संस्मरण : पथ के साथी। निबंध व भूमिकाएँ : श्रृंखला की कड़ियाँ, क्षणदा, संकल्पिता। उन्होंने ‘चाँद’ पत्रिका का संपादन किया। उन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक, पद्म भूषण तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विधा : संस्मरण
‘गिल्लू’ महादेवी का एक संस्मरण है, जिसमें उन्होंने एक गिलहरी (गिल्लू) की जीवन-शैली का मार्मिक वर्णन किया है। इसमें प्राणि-मात्र के प्रति उनका प्रेम, करुणा और हृदय की संवेदनशीलता झलकती है। भाषा सरल, सजीव, चित्रमयी और प्रतीकों से युक्त है, जिसमें बीच-बीच में संस्कृत के शब्द मोतियों की भाँति चमकते हैं।
संस्मरण का सार
सोनजुही की लता में एक दिन पीली कली देखकर लेखिका को उस छोटे जीव (गिल्लू) का स्मरण हो आया जो उसी लता में छिपकर बैठता और लेखिका के पास पहुँचते ही कंधे पर कूदकर उन्हें चौंका देता था। एक दिन लेखिका ने देखा कि दो कौवे एक गमले के पास घायल गिलहरी के छोटे बच्चे को चोंच मार रहे थे। वह बच्चा घोंसले से गिर पड़ा था और निश्चेष्ट-सा गमले से चिपका पड़ा था। लेखिका ने उसे उठाकर रुई से रक्त पोंछा, घावों पर पेंसिलिन का मरहम लगाया और रुई की बत्ती से दूध पिलाने का प्रयास किया।
कई घंटे के उपचार के बाद उसके मुँह में एक बूँद पानी टपकाया जा सका। तीसरे दिन वह इतना स्वस्थ हो गया कि उसने लेखिका की उँगली पकड़ ली। तीन-चार मास में उसके चिकने रोएँ, झब्बेदार पूँछ और चंचल चमकीली आँखें सबको आकर्षित करने लगीं। जातिवाचक संज्ञा को व्यक्तिवाचक रूप देकर उसका नाम गिल्लू रख दिया गया। लेखिका ने फूलों की एक हलकी डलिया में रुई बिछाकर उसे खिड़की पर लटका दिया — वही दो वर्ष गिल्लू का घर रहा।
गिल्लू लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए पैर से परदे पर चढ़-उतरकर दौड़ लगाता। भूख लगने पर ‘चिक-चिक’ करके सूचना देता; काजू उसका प्रिय खाद्य था। पहला बसंत आने पर जब बाहर की गिलहरियाँ जाली के पास चिक-चिक करतीं, तो लेखिका ने उसे मुक्त करना आवश्यक समझकर जाली का एक कोना खोल दिया। गिल्लू दिन भर बाहर गिलहरियों के झुंड का नेता बनकर उछलता-कूदता और ठीक चार बजे लौट आता।
जब लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल में रहीं, तब गिल्लू ने बहुत कम काजू खाए। अस्वस्थता के समय वह तकिए पर सिरहाने बैठकर नन्हे पंजों से उनके सिर और बालों को सहलाता — मानो कोई परिचारिका (सेविका) सेवा कर रही हो। गर्मियों में वह लेखिका के पास रखी सुराही पर लेट जाता। गिलहरियों के जीवन की अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती, अतः गिल्लू की जीवन-यात्रा का अंत आ गया। अंतिम रात वह झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया और ठंडे पंजों से उनकी वही उँगली पकड़कर, जिसे बचपन में मरणासन्न स्थिति में पकड़ा था, चिपक गया। प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया।
उसका झूला उतार दिया गया और जाली बंद कर दी गई, पर गिलहरियों की नई पीढ़ी जाली के उस पार चिक-चिक करती रहती है और सोनजुही पर बसंत आता रहता है। गिल्लू को सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी गई — इसलिए भी कि वह लता उसे सबसे प्रिय थी, और इसलिए भी कि उस लघुगात का किसी वासंती दिन जुही के पीताभ फूल में खिल जाने का विश्वास लेखिका को संतोष देता है।
शब्दार्थ
गिल्लू = गिलहरी (गिलाई, चेखुरा) — चूहे जैसी मोटी रोएँदार पूँछवाला छोटा जीव जो पेड़ों पर रहता है। काक भुशुण्डि = एक ब्राह्मण जो लोमश मुनि के शाप से कौआ हो गए थे और प्रभु श्रीराम के बड़े भक्त थे। अवमानित = अपमानित। पितरपक्ष = क्वाँर की कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक का समय, जब मृत पूर्वजों के नाम पर श्राद्ध किया जाता है। कीलें = काँटा, खूँटी। सिरहाने = चारपाई में सिर की ओर का भाग। वासंती = वसंत-संबंधी, मदनोत्सव। सोनजुही = एक प्रकार का पीला फूल। अनायास = आसानी से, बिना प्रयास। हरीतिमा = हरियाली। लघुप्राण/लघुगात = छोटा जीव/छोटा शरीर। छूआ-छुऔवल = छूने-छिपने का खेल। समादरित = विशेष आदर। अनादरित = आदर का अभाव, तिरस्कार। अवतीर्ण = प्रकट। कर्कश = कटु, कानों को न भानेवाला। काकद्वय = दो कौए। निश्चेष्ट = बिना किसी हरकत के। आश्वस्त = निश्चिंत। स्निग्ध = चिकना। विस्मित = आश्चर्यचकित। अपवाद = सामान्य नियम को बाधित करनेवाला। घोंसला = नीड़। परिचारिका = सेविका। मरणासन्न = जिसकी मृत्यु निकट हो। उष्णता = गरमी। पीताभ = पीले रंग का।
प्रश्न और अभ्यास — उत्तर
1सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका के मन में कौन-से विचार उमड़ने लगे?
सोनजुही में पीली कली देखकर लेखिका को उस छोटे जीव गिल्लू का स्मरण हो आया, जो इसी लता की सघन हरीतिमा में छिपकर बैठता और लेखिका के निकट पहुँचते ही कंधे पर कूदकर उन्हें चौंका देता था। उन्हें लगा कि कहीं वही गिल्लू स्वर्णिम कली के बहाने उन्हें चौंकाने ऊपर तो नहीं आ गया।
2गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया?
लेखिका उसे सावधानी से उठाकर अपने कमरे में लाईं, रुई से रक्त पोंछकर घावों पर पेंसिलिन का मरहम लगाया। रुई की पतली बत्ती दूध से भिगोकर उसके मुँह में लगाने का प्रयास किया। कई घंटे के उपचार के बाद उसके मुँह में एक बूँद पानी टपकाया जा सका। तीसरे दिन वह इतना स्वस्थ हो गया कि उसने लेखिका की उँगली अपने नन्हे पंजों से पकड़ ली।
3लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था?
जब लेखिका लिखने बैठतीं, तब गिल्लू उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए उनके पैर तक आकर सर्र से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेजी से उतरता। उसका यह दौड़ने का क्रम तब तक चलता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए न उठ जातीं।
4गिल्लू का कार्य-कलाप कैसा था?
गिल्लू अपने झूले को स्वयं हिलाकर झूलता और काँच के मनकों-सी आँखों से कमरे के भीतर व खिड़की से बाहर न जाने क्या देखता-समझता रहता। वह कभी फूलदान के फूलों में, कभी परदे की चुन्नट में तो कभी सोनजुही की पत्तियों में छिप जाता। उसकी समझदारी और कार्यकलाप पर सबको आश्चर्य होता था।
5लेखिका को क्यों ऐसा लगा कि गिल्लू को मुक्त करना आवश्यक है?
जब गिल्लू के जीवन का पहला बसंत आया, तो बाहर की गिलहरियाँ खिड़की की जाली के पास आकर चिक-चिक करने लगीं। गिल्लू को जाली के पास बैठकर अपनेपन से बाहर झाँकते देखकर लेखिका को लगा कि अब इसे मुक्त करना आवश्यक है — इसलिए उन्होंने जाली का एक कोना खोल दिया।
6लेखिका की अस्वस्थता में गिल्लू क्या करता था?
लेखिका की अस्वस्थता में गिल्लू तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे-नन्हे पंजों से उनके सिर और बालों को इतने हौले-हौले सहलाता रहता कि उसका हटना एक परिचारिका (सेविका) के हटने के समान लगता। मोटर दुर्घटना के बाद उन दिनों उसने अपना प्रिय खाद्य काजू भी बहुत कम खाया।
7गर्मी से बचने का कौन-सा उपाय गिल्लू ने खोज निकाला था?
गर्मियों में जब लेखिका दोपहर में काम करती रहतीं, तो गिल्लू न बाहर जाता, न अपने झूले में बैठता। उसने लेखिका के निकट रहने के साथ-साथ गर्मी से बचने का एक नया उपाय खोज निकाला — वह लेखिका के पास रखी सुराही पर लेट जाता और इस प्रकार समीप भी रहता और ठंडक में भी रहता।
8गिल्लू की किन चेष्टाओं से लेखिका को लगा कि अब उसका अंत समय समीप है?
गिलहरियों के जीवन की अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती। अंत के दिन गिल्लू ने दिन भर न कुछ खाया न बाहर गया। रात में अंत की यातना में भी वह अपने झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया और ठंडे पंजों से उनकी वही उँगली पकड़कर चिपक गया, जिसे उसने बचपन में मरणासन्न स्थिति में पकड़ा था। इन्हीं चेष्टाओं से लेखिका समझ गईं कि उसका अंत समय निकट है।
9सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?
गिल्लू को उसकी सबसे प्रिय सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी गई। लेखिका के मन में यह विश्वास जन्म लेता है कि उस लघुगात (छोटे जीव) का किसी वासंती दिन जुही के पीताभ (पीले) छोटे फूल में खिल जाना — यही विश्वास उन्हें संतोष देता है।
10लेखिका को उस लघुप्राण गिल्लू की खोज क्यों थी?
पहले लेखिका को सोनजुही की कली की खोज रहती थी, पर अब उस लघुप्राण (गिल्लू) की खोज है — क्योंकि वही नन्हा जीव उनके स्नेह और करुणा का पात्र बन गया था और उसकी स्मृति उनके हृदय में गहराई से बसी थी। उसके बिना सोनजुही की कली भी उन्हें उसी की याद दिलाती है।
11एक या दो वाक्य : (क) किसे देखकर लेखिका को गिल्लू का स्मरण आया? (ख) गिल्लू लेखिका को कैसे चौंका देता था? (ग) स्वर्णिम कली देखकर लेखिका को क्या लगा? (घ) कौवे को कब सम्मानित किया जाता है? (ङ) लघुप्राण क्यों निश्चेष्ट-सा गमले में चिपटा पड़ा था?
(क) सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर। (ख) लता में छिपकर बैठता और निकट आते ही कंधे पर कूदकर चौंका देता। (ग) लगा कि कहीं गिल्लू ही कली के बहाने उसे चौंकाने ऊपर तो नहीं आ गया। (घ) पितरपक्ष (श्राद्ध के दिनों) में। (ङ) क्योंकि कौवों की चोंच के दो घाव उस लघुप्राण के लिए बहुत थे (वह घायल व निर्बल था)।
12एक या दो वाक्य : (च) भूख लगने पर गिल्लू क्या करता था? (छ) गिल्लू का नित्य का क्रम कैसा था? (ज) लेखिका की अस्वस्थता में गिल्लू का हटना किसके हटने के समान लगता था? (झ) गिल्लू की जीवन-यात्रा का अंत क्यों आ गया? (ञ) किस स्पर्श के साथ गिल्लू सो गया?
(च) ‘चिक-चिक’ करके सूचना देता और काजू या बिस्कुट माँगता। (छ) बाहर जाकर दिन भर गिलहरियों के झुंड का नेता बनकर उछलता-कूदता और ठीक चार बजे भीतर आकर झूले में झूलने लगता। (ज) एक परिचारिका (सेविका) के हटने के समान। (झ) क्योंकि गिलहरियों के जीवन की अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती। (ञ) प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ।
13एक-एक शब्द : (क) लघुप्राण किसे कहा गया है? (ख) दो कौवे कैसा खेल खेल रहे थे? (ग) प्रथम बसंत का क्या प्रभाव पड़ा? (घ) गिल्लू किसका नेता बनता था? (ङ) किसके पास बहुत पशु-पक्षी हैं?
(क) गिल्लू (गिलहरी का बच्चा)। (ख) छूआ-छुऔवल। (ग) नीम-चमेली की गंध कमरे में आने लगी (गिल्लू बाहर जाने को व्याकुल हुआ)। (घ) गिलहरियों के झुंड का। (ङ) लेखिका (महादेवी वर्मा) के पास।
14एक-एक शब्द : (च) गिल्लू का प्रिय खाद्य कौन-सा था? (छ) अस्वस्थता में गिल्लू कहाँ बैठता था? (ज) गिलहरियों के जीवन की अवधि कितने वर्ष से अधिक नहीं होती? (झ) गिल्लू ने किस स्थिति में लेखिका की उँगली पकड़ी थी? (ञ) गिल्लू को कहाँ समाधि दी गई?
(च) काजू। (छ) तकिए पर सिरहाने। (ज) दो वर्ष। (झ) मरणासन्न (मृत्यु के निकट) स्थिति में। (ञ) सोनजुही की लता के नीचे।
15अवतरणों के अर्थ स्पष्ट कीजिए : (क) ‘तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राण की खोज है।’ (ख) ‘उसका हटना एक परिचारिका के हटने के समान लगता।’ (ग) ‘प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया।’
(क) पहले लेखिका को सुंदर फूल-कली की चाह रहती थी, पर अब गिल्लू की मृत्यु के बाद उसे उसी नन्हे जीव की स्मृति की खोज है — स्नेह ने प्राथमिकता बदल दी।
(ख) गिल्लू बीमारी में इतनी कोमलता से सिर-बाल सहलाता कि उसका हट जाना एक कुशल सेविका के चले जाने जैसा कष्टकर लगता।
(ग) यह गिल्लू की मृत्यु का काव्यात्मक वर्णन है — ‘सो गया’ अर्थात् मर गया; ‘किसी और जीवन में जागने के लिए’ अर्थात् पुनर्जन्म/नये रूप में प्रकट होने के विश्वास की ओर संकेत।
16रिक्त स्थान भरिए : (क) कौन जाने ___ के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। (ख) ___ की गंध मेरे कमरे में हौले-हौले आने लगी। (ग) हमने उसकी ___ संज्ञा को व्यक्तिवाचक रूप दे दिया। (घ) जिसे उसने बचपन की ___ स्थिति में पकड़ा था। (ङ) ___ छोटे फूल में खिल जानेका विश्वास मुझे संतोष देता है।
(क) स्वर्णिम कली। (ख) नीम-चमेली। (ग) जातिवाचक। (घ) मरणासन्न। (ङ) जुही के पीताभ।
17(MCQ) सही विकल्प : (क) दो कौवे कैसा खेल खेल रहे थे? (ख) लेखिका के किस विवेचन में बाधा आ पड़ी? (ग) कमरे में किसकी गंध आने लगी? (घ) गिल्लू का प्रिय खाद्य? (ङ) गिलहरियों के जीवन की अवधि कितने वर्ष से अधिक नहीं?
(क) (ii) छूआ-छुऔवल। (ख) (ii) काक पुराण। (ग) (iii) नीम-चमेली। (घ) (iv) काजू। (ङ) (ii) दो।